उत्तर प्रदेश कुशीनगर राजनीति

कुशीनगरःःभाकियू भानु गुट ने चीनी मिल चलाने की मांग को लेकर गन्ना आयुक्त को सौंपा ज्ञापन

News
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

 

डेस्क.कुशीनगर। भारतीय किसान यूनियन (भानु) की जिला इकाई, कुशीनगर के जिलाध्यक्ष रामचन्द्र सिंह द्वारा लक्ष्मीगंज बन्द चीनी मील को चलवाने या यहां पर नया चीनी मील लगवाने के लिये एक ज्ञापन गन्ना आयुक्त, लखनऊ को सौपा गया और ज्ञापन के माध्यम से श्री सिंह ने अवगत कराया है कि लक्ष्मीगंज बन्द चीनी मील को चलवाने के लिये हमारे यूनियन द्वारा मार्च 2017 से लगातार माँग किया जा रहा है| लोकसभा चुनाव 2019 में जब देश के प्रधानमन्त्री और सूबे के मुख्यमन्त्री 12 मई 2019 को कप्तानगंज में आये थे उस समय भी उनके द्वारा कहा गया था की केंद्र में हमारी सरकार बनी तो जनपद कुशीनगर की बन्द चीनी मीलों को चलवायेगें मगर उनका वादा धाक के तीन पात वाली कहानी बनकर रह गया| लक्ष्मीगंज बन्द चीनी मील चलने योग्य है और बिबादित परिस्थियां ना के बराबर है साथ ही साथ इसको चालू करने हेतु हर प्रकार की उपयुक्त सुविधा मौजूद है| लक्ष्मीगंज बन्द चीनी मील को चलवाने के लिये पडरौना के सांसद लोकसभा में भी आवाज उठा चुके है| श्री सिंह ने आगे बताया है कि मैंने देश सेवा मे अपने जीवन का बहुमूल्य समय ब्यतीत किया लेकिन यह नहीं जानता था कि एक किसान का बेटा होना और एक गन्ना किसान होना आज के समय मे अभिशाप बनकर रह गया है| मैंने अपना जीवन देश सेवा के बाद किसान सेवा के लिये समर्पित किया है| बन्द कमरे मे लिये फैसले सरकार एवं शासन के निगाह मे वाहवाही के लिये काफी होंगे लेकिन उससे लाखो किसान बर्बाद भी होते है और पैसे वाले आबाद| योगी सरकार ने हम्रारे पूर्वांचल क्षेत्र मे पिपराइच चीनी मिल लगवाया जो पिछले पेराई सत्र 2018-19 में मात्र 20 से 22 दिन ही चली क्योकि चुनाव में नही चलती तो भाजपा के वोट बैंक मे कमी आ जाता| पिपराईच चीनी मील शुरू हो जाने के वजह से योगी सरकार बधाई के पात्र है कि पूर्वांचल का विकास हुआ| लेकिन लक्ष्मीगंज परिक्षेेत्र का किसान जानना चाहता है कि जब पिपराइच क्षेत्र मे मात्र 1200 से 1400 हेक्टेयर भूमि मे ही गन्ना है और वहां गन्ने का पैदावार लगभग 5 लाख कुन्तल ही है वहां चीनी मिल लगा दी गयी मगर उन क्षेत्रों को अनदेखा कर दिया गया जहा के गन्ने से तीन तीन चीनी मिलें चलायी जाती है ऐसा क्यों किया गया? क्या इसका जबाब आप और योगी सरकार के पास है? किसान जानना चाहता है कि क्यों नही लक्ष्मीगंज चीनी मील का जीवोर्धार किया गया जहाँ के गन्ने और किसानो के त्याग से रामकोला, ढाड़ा, कप्तानगंज आदि चीनी मिले पूरे 4 से 5 महीने चलती है| आगे श्री सिंह ने बताया है कि आपके पास तो गन्ना क्षेत्र के आकडे आते होंगे और आप देखते होंगे कि लक्ष्मीगंज परिक्षेत्र के किसानों के साथ ऐसा सौतेला ब्यवहार क्यों? क्या यहाँ का किसान अपने गन्ने को लेकर ऐसे ही मारा मारा हर मिल के गेट तक भागे भागे फिरे? लगता है जनपद कुशीनगर के जिला गन्ना अधिकारी द्वारा इस क्षेत्र के गन्ने का आकड़ा और गन्ना उत्पादन का सही आकड़ा आपको नही बताया जाता होगा? मै बताना चाहता हूँ कि बन्द कमरे मे बैठकर किसानो के भविष्य का फैसला करना बन्द किया जाय और योगी सरकार अपनी तानाशाही किसानो पर जबरजस्ती ना थोपे, अन्यथा वह दिन दूर नहीं जब रामकोला का 1992 का कांड गन्ना भुगतान एवं गन्ना संरक्षण को लेकर इसी भाजपा शासन मे पुनः दोहराने का अवसर न दिया जाए| पूर्वांचल भ्रष्टाचार और तानाशाही से जल उठा है| ये आवाज़ पूर्वांचल के उन किसानो के दर्द और पीड़ा की आवाज़ है जिनके ऊपर चंद दलालो, साहुकारो की दलील पर आप हम किसानो का गन्ना कही भीं आवंटित कर देते है| हमारी भी मंशा जाने हम कृषक क्या चाहते है? उत्तरप्रदेश सरकार लक्ष्मीगंज चीनी मिल बन्द कर दिया, बेच दिया, और आराम से सो गये? लेकिन अब इस परिक्षेत्र का किसान सरकार को आराम से सोने नहीं देंगे क्योकि लक्ष्मीगंज के किसानो का दर्द तेज़ाब बनकर आँखों से गिरना शुरू हो गया है| हमारे लक्ष्मीगंज समिति मे आज लगातार 7 से 8 वर्षों मे गन्ना क्षेत्र मे बढ़ोतरी हुई और उत्पादन भी बढ़ा लेकिन लक्ष्मीगंज बन्द चीनी मील नहीं चला- क्यों? आप अगर लक्ष्मीगंज चीनी मिल को जीर्णोधार नही करा सकते तो लक्ष्मीगंज समिति क्षेत्र का गन्ना चंद साहुकारो के कहने पर आवंटित भी नहीं कर सकते? मेरे लक्ष्मीगंज से हर वर्ष 40 से 45 लाख कुन्तल गन्ना तीनो चीनी मीलो को जाता है| रामकोला चीनी मिल को 20 से 25 लाख, ढाड़ा चीनी मिल को 5 से 7 लाख, और कप्तानगंज चीनी को 10 से 15 लाख कुन्तल गन्ना लक्ष्मीगंज परिक्षेत्र से दिया जाता है| परन्तु पेराई सत्र 2018-19 में राज्य सरकार की गलत नीतियों के वजह से लक्ष्मीगंज परिक्षेत्र का ही नही जनपद का लगभग 12 लाख कुन्तल गन्ना बिहार के गोपालगंज, सासामूसा चीनी मील को किसान पर्ची के आभाव में ले जाने को मजबूर हो गये थे और जिले का गन्ना अधिकारी अपने आखों में पट्टी बाँधकर चुपचाप नजारा देख रहे थे| लक्ष्मीगंज परिक्षेत्र का किसान लगभग 2 लाख कुन्तल गन्ना कौडियों के भाव क्रेशर पर देनें के लिये मजबूर हो जाते है| क्या यही व्यवस्था आप और योगी सरकार द्वारा किया गया| उत्तर प्रदेश का किसान अपने नजदीक के मील को छोड़कर दुसरे राज्य में गन्ना बेचने को मजबूर हो गया है क्या इससे समितियों को नुकसान नही हुआ?
लक्ष्मीगंज परिक्षेत्र का किसान भारतीय जनता पार्टी के गलत नीतियों के वजह से एकदम उत्तेजित और आक्रोशित हो गया है उनका कहना है कि यदि योगी सरकार अपने संसदीय क्षेत्र के पिपराईच में एक नया गन्ना मील लगवा सकते है तो लक्ष्मीगंज की बन्द चीनी मील को चालू क्यों नही करा रहे है या यही पर एक नया चीनी मील क्यों नही लगवा रहे है? क्या कुशीनगर के किसान बीजेपी को वोट नही दिए है? जबकि लक्ष्मीगंज चीनी मिल क्षेत्र मे 5 महीने पेराई करने भर का गन्ना पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रहता है और इसी गन्ने के सहारे जनपद की तीन तीन चीनी मीलें रामकोला, ढाड़ा और कप्तानगंज 4 से 5 महीने तक चलती है| अन्त में यूनियन के जिलाध्यक्ष श्री रामचन्द्र सिंह ने गन्ना आयुक्त को बताया है कि लक्ष्मीगंज बन्द चीनी मील को चलवाने या यहाँ पर नया चीनी मील लगवाने के लिये आप अपने स्तर से कोशिश करके इस मील को चलवाने में अपनी अहम भूमिका निभावें जो इस परिक्षेत्र के किसानों के हित में मील का पत्थर साबित होगा| इस मौके पर यूनियन के प्रदेश उपाध्यक्ष रमेन्द्र पाण्डेय, महिला जिलाध्यक्ष बाराबंकी, पुष्पा पाण्डेय, जिला सचिव, कुशीनगर, चेतई प्रसाद मौजूद रहे।

About the author

Aditya Prakash Srivastva