पश्चिमी चम्पारण बिहार बेतिया राज्य

बेतिया(प.चं.) :: शहर की छोटीबड़ी खबरें एकसाथ

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शहाबुद्दीन आमद, कुशीनगर केसरी/केके न्यूज24, बेतिया प० चंपारण(०९ दिसंबर) की रिपोर्ट…..

बच्चों के विवादों में मारपीट, प्राथमिकी दर्ज

स्थानीय मुफस्सिल थाना क्षेत्र के कई क्षेत्रों में विभिन्न- विभिन्न विवादों में बच्चों के विवाद को लेकर 2 महिलाओं को कतिपय तत्वों ने मारपीट कर घायल कर दिया है, जिनका इलाज बेतिया सदर अस्पताल में चल रहा है।
मुफस्सिल थाना अध्यक्ष ,अशोक कुमार ने संवाददाता को बताया कि पिपरा पकड़ी गांव निवासी चिंता की शिकायत पर उमेश मांझी, अर्जुन कुमार, पिंकी देवी, तथा अशोक माझी को नामजद किया गया है ,आरोप है कि बच्चों के विवाद को लेकर गाली गलौज, व मारपीट किया गया, वहीं हरी- बाटिका निवासी अंजली देवी ने अपने पड़ोसी टुनटुन राम ,समेत अन्य के विरुद्ध एफआइआर दर्ज कराई है, एफ आई आर में बताया गया है कि वह दरवाजे पर अपनी पुत्री,खुशबू के साथ बैठी थी ,इसी बीच खुशबू और टुनटुन राम की बेटी के बीच झगड़ा हो गया , जिसको लेकर टुनटुन राम, करण कुमार, भू लेटर गीता देवी ने उसे मारपीट कर बुरी तरह जख्मी कर दिया और वह बेहोश हो गई उनके पति बचाने आए तो उन्हें भी मारपीट गाली-गलौज को बुरी तरह जख्मी कर दिया गया है।
बच्चों के विवादों को लेकर इस तरह की घटनाएं सामाजिक स्तर पर सुलझाने के बजाय प्राथमिकी दर्ज कर और मामला फंस जाता है तथा दुश्मनी भी बढ़ जाती है, अगर पंचायती स्तर पर इस मामले को सुलझा दिया जाता तो इस तरह की घटना नहीं घटती, सामाजिक तौर पर इस तरह की घटना को सुलझाने के लिए क्षेत्र के लोगों को पहल करनी चाहिए ताके पुलिस एवं न्यायालय के चक्कर में नहीं पड़ना पड़े जिससे आर्थिक व मानसिक परेशानियां बढ़ जाती हैं।

इंटरनेट पर आसानी से मिलने वाली पोर्नोग्राफी पर रोक लगाने की मांग की : सुरैया शहाब

इन दिनों इंटरनेट पर सर्व सुलभ पोर्नोग्राफी पर रोक लगाने की चर्चा पूरे देश में छिड़ गई है, राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू से लेकर सुबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तक पोर्नोग्राफीग्र को प्रतिबंधित करने की वकालत कर चुके हैं ,बहस का विषय यह है कि इंटरनेट पर सहज उपलब्ध अश्लीलता और नग्नता, यंगिस्तान को उत्तेजक और विकृत मानसिकता का शिकार बनाता है ,और वे उत्तेजना में दुष्कर्म जैसे कृत्य के लिए आतुर होते हैं, सतही तौर पर इससे सहमत हुआ जा सकता है, लेकिन भारत में कुल इंटरनेट देखने में 70 फ़ीसदी हिस्सा सिर्फ और सिर्फ पोर्नोग्राफी देखने में खर्च किया जाता है। भारत, अमेरिका और ब्रिटेन के बाद पोर्नोग्राफी देखने में तीसरा बट सबसे बड़ा तीसर उपभोक्ता देश बन गया है ,इस इस विषय पर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संघ (भारत )की जिला इकाई की जिला अध्यक्ष ,सुरैया शाहाब ने सरकार से मांग की है कि इंटरनेट पर आसानी से मिलने वाली पोर्नोग्राफी पर रोक लगाई जाए ताकि बच्चे -बच्चियों के अंदर सेक्स के प्रति रुझान जो बढ़ता जा रहा है वह नियंत्रित किया जा सकेगा ,अगर इस पर नियंत्रण करने की दिशा में सरकार की ओर से या सामाजिक ओर से कार्रवाई नहीं होगी तो निर्भय जैसा कांड प्रतिदिन होता रहेगा और इस पर किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं हो पाएगी, इंटरनेट पर यह सुविधा आसानी से मोबाइल के माध्यम से भी मिल जा रही है जिससे कम उम्र के युवक-युवतियों को पोर्नोग्राफी के माध्यम से कई तरह की मानसिक, शारीरिक, आर्थिक शोषण भी हो रहा है, जिससे युवक-युवतियों में सेक्स के प्रति उत्तेजना जग रही है और इस तरह की घटनाएं करने पर मजबूर हो रहे हैं ,अगर सरकारी स्तर से इस पर नियंत्रण नहीं किया जाएगा तो भविष्य में इसका अंधकार ही नजर आएगा।
आजकल के नवयुवक -नव युवतियों में पठन-पाठन में मन नहीं लगा कर केवल मोबाइल के माध्यम से पोर्नोग्राफी पर ज्यादा ध्यान आकर्षित कर रहे हैं जिसके कारण इस तरह की घटनाएं घट रही हैं जो समाज के लिए कलंक का जिम्मा बनता जा रहा है, समाज के हम सभी लोगों का यह जिम्मेदारी बनती है के नवयुवक -नव युवतियों को ऐसी मानसिकता से बचाया जाए और उन्हें मोबाइल की सेवा से अलग रखा जाए, क्योंकि पढ़ने वाले बच्चे -बच्चियों को मोबाइल की कोई आवश्यकता नहीं है, इसकी सारी जिम्मेवारी परिवार के माता- पिता की बनती है कि अपने बच्चे- बच्चियों को स्कूल और कॉलेज भेजने के पूर्व उनका मोबाइल ले ले ताकि इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके तथा बच्चों की मानसिकता पर बुरा प्रभाव नहीं पड़े।

वित्तरहित शिक्षकों की समस्याओं का जल्द निदान करें सरकार : प्रो०रणजीत कुमार

बिहार शिक्षा मंच के संयोजक तथा सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के भावी प्रत्याशी प्रो०डॉ०रणजीत कुमार ने वित्तरहित शिक्षकों के समस्याओं के जल्द निदान हेतु बिहार सरकार के शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव को स्मार-पत्र भेजते हुए कहा है कि बिहार के संबद्ध माध्यमिक, उच्चतर माध्यमिक एवं डिग्री कॉलेजों का बिहार के ग्रामीण अंचल में शिक्षा के व्यापक प्रचार-प्रसार में महती योगदान है। इन शिक्षण संस्थानो के महत्व एवं योगदान को स्वीकार करते हुए सरकार ने 2008 से इन्हें परीक्षाफल आधारित अनुदान देने का ऐलान किया। एक दशक के उपरांत यदि सरकार की इस नीति की समीक्षा किया जाए तो निष्कर्ष उत्साहवर्द्धक दिखाई नही देता । सरकार द्वारा घोषित एवं प्रवर्तित परीक्षाफल आधारित अनुदान की अपनी सीमाएं है। वित्तरहित माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों को शैक्षणिक सत्र 2013 तक का ही अनुदान आवंटित हुआ है।अनुदानित डिग्री कॉलेजों की स्थिति तो और भी बदतर है। बिहार के अन्य विश्वविद्यालयो में शैक्षणिक सत्र 2011 तक की अनुदान राशि शिक्षा विभाग द्वारा विमुक्त किया गया है जबकि जयप्रकाश विश्वविद्यालय ,छपरा में तो शैक्षणिक सत्र 2010 तक का ही अनुदान राशि शिक्षकों को प्राप्त हुआ है। माध्यमिक स्तर का 6 वर्ष का और डिग्री स्तर पर 8 वर्ष का अनुदान बकाया रहना इस तथ्य को इंगित करता है कि परीक्षाफल आधारित अनुदान की व्यवस्था नीतिगत एवं क्रियान्वयन दोनों स्तरों पर विफल हो चुकी है। समय पर अनुदान नही मिलने से शिक्षकों की माली हालत बहुत खराब है। बड़ी संख्या में शिक्षक अवकाश ग्रहण कर रहे है। शिक्षकों को सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा की छतरी भी हासिल नही है। दूसरी तरफ जयप्रकाश विश्वविद्यालय से संबद्ध 11 महाविद्यालयो में कार्यरत 200 से अधिक शिक्षकों का विश्वविद्यालय प्रशासन की उदासीनता एवं निहित स्वार्थ की वजह से आज तक सेवा नियमितिकरण नही हो पाया है जिससे इन शिक्षकों का भविष्य अंधकारमय नज़र आता है। अगर इन शिक्षकों को न्याय नहीं मिला तो इनके परिवार एवं बच्चों को भूखे मरने की नौबत आ जाएगी।बिहार सरकार के हाल के एक निर्णय से प्रत्येक पंचायत में एक +2 स्तरीय विद्यालय खुलेगा से वित्तरहित शिक्षण संस्थाओ के अस्तित्व पर ही ग्रहण लग जाने की संभावना है। एक सुनियोजित तरीके से वित्तरहित शिक्षण संस्थाओं को बंदी के कगार पर पहुँचाने का काम हो रहा है।सीट वृद्धि का निर्णय पहले ही वापस लिया जा चुका है जिससे इन शिक्षण संस्थानों में आधी सीट ही रह गई है।इससे शिक्षकों एवं कर्मचारियों को मिलने वाली अनुदान राशि भी काफी कम हो जाएगी ।कुल मिलाकर इन संस्थानों के समक्ष संकट बहुत गंभीर है। वर्तमान हालात में छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने का सरकार का दावा हथेली पर घास उगाने जैसा है। सरकार यदि राज्य में छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के प्रति गंभीर है।प्रो०कुमार ने सरकार से आग्रह करते हुए निम्नलिखित बिंदुओं पर जल्द से जल्द सकारात्मक कदम उठाने की मांग की है।
1.अनुदानित माध्यमिक विद्यालयों का सरकार अभिलंब अधिग्रहण करें। 2.संबद्ध इंटरमीडिएट एवं डिग्री कॉलेजों को परीक्षाफल आधारित अनुदान के बदले घाटानुदान या वेतनमान दिया जाए ताकि शिक्षा व्यवस्था में शुचिता एवं गुणवत्ता लाया जा सके । 3.वित्तरहित कॉलेज में अध्यापन करने वाले शिक्षकों को सहायक प्राध्यापक की बहाली में 20 प्रतिशत अधिभार (वेटेज) मिलना चाहिए ताकि उनके अनुभव का फायदा छात्रों को मिल सके। 4.चयन समिति की सिफारिश एवं शासी निकाय से अनुमोदन प्राप्त शिक्षकों की सेवा नियमितिकरण संबंधी अधिसूचना निर्गत करने हेतु जयप्रकाश विश्वविद्यालय प्रशासन को अभिलंब निर्देश जारी किया जाए। 5.माध्यमिक एवं उच्चत्तर माध्यमिक शिक्षकों के अवकाशग्रहण करने की उम्र सीमा 60 वर्ष से बढ़ाकर 65 वर्ष किया जाए। 6.बकाया अनुदान राशि एकमुश्त विमुक्त किया जाय। 7.अनुदानित शिक्षण संस्थानों में कार्यरत शिक्षकों एवं कर्मचारियों की सामाजिक -आर्थिक सुरक्षा के मद्देनजर सेवांत लाभ एवं पेंशन देने का प्रावधान किया जाए।
उम्मीद है कि सरकार इन वित्तरहित अनुदानित शिक्षण संस्थानों की चिरलंबित समस्याओं के समाधान हेतु शीघ्र सकारात्मक कदम उठाएगी।

कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की लड़कियों को मिलेगा ब्लैक बेल्ट व रोजगार

बिहार शिक्षा परियोजना परिषद, पटना के द्वारा निर्गत आदेश के आलोक में कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की बच्चियां अब सिर्फ आत्मरक्षा के लिए ही कराटे नहीं सीखेंगी, बल्कि इसमें अपना कैरियर भी बना सकेंगे। अब इन लड़कियों को इच्छा अनुसार कराटे में ब्लैक बेल्ट तक को प्रशिक्षण दिया जाएगा। कक्षा 6 से 8 तक की लड़कियां की पहले मात्र 10 दिनों का प्रशिक्षण दिलाया जाता था जिसे बढ़ाकर 36 दिनों का किया जा रहा है। बेसिक प्रशिक्षण के बाद यह लड़कियां बेल्ट में प्रगति के लिए आगे भी प्रशिक्षण जारी रख सकेंगे ।बिहार शिक्षा परियोजना परिषद राज्य के 534 प्रखंडों में संचालित स्कूलों में चरणबद्ध तरीके से इसे मार्च 2020 तक लागू करेगा। आवासीय विद्यालय में पढ़ने वाली लड़कियां जो कराटे में ब्लैक बेल्ट होंगी उन्हें रोजगार का अवसर भी मिलेगा ,इसी स्कूल में यह लड़कियां प्रशिक्षक के तौर पर काम करेंगे,जिनहें हर दिन ₹500 की दर से उन्हें प्रा श्रमिक दिया जाएगा। 36 दिनों के प्रशिक्षण के बाद लड़कियों की परीक्षा होगी, इसके आधार पर उनकी ग्रेडिंग कर बेल्ट भी बदल दिया जाएगा। कराटे सीखने के लिए उत्सुक लड़कियों को आगे भी प्रशिक्षण दिलाया जाता रहेगा, इन लड़कियों को ब्लैकबेल्ट तक प्रशिक्षण दिलाया जाएगा। विद्यालय में 156 कराटे प्रशिक्षकों में 10 लड़कियों प्रशिक्षक के रूप में काम करेंगे।
जिले के कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में दलित और अति पिछड़े वर्ग की लड़कियों को छात्रावास की सुविधा के साथ पढ़ाई की भी मौका मिलता है, बच्चियों को इसमें खाना कपड़ा, कॉपी ,किताब सभी सरकार की सुविधाएं मिलती हैं ।शिक्षा पदाधिकारियों को स्कूल मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में 156 कराटे प्रशिक्षक हैं ,इसमें लगभग 10 लड़कियां हैं, जो कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में हींं पढ़ाई की है। विभाग का लक्ष्य है के इन स्कूलों में प्रशिक्षक के तौर पर यहां से पढ़ाई और कराटे सिखाने वाली लड़किया हों।

डी.लिट की मानक उपाधि एवं गांधी ग्लोबल पीस अवार्ड से सम्मानित हुए स्वच्छ भारत मिशन के ब्रांड एंबेसडर डॉ एजाज अहमद

जी-20 देशों के विश्व शांति दूतों के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में डी.लिट की मानक उपाधि एवं गांधी ग्लोबल पीस अवार्ड से सम्मानित हुए स्वच्छ भारत मिशन के ब्रांड एंबेसडर सह सचिव सत्याग्रह रिसर्च फाउंडेशन डॉ एजाज अहमद !जी-20 देशों के विश्व शांति दूतों के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं कस्तूरबा गांधी 150 वी जन्म शताब्दी पर भारत के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर (मध्य प्रदेश) में गांधी पीस फाउंडेशन नेपाल द्वारा आयोजित विश्व शांति दूतों का अंतरराष्ट्रीय समारोह का आयोजन 8 दिसंबर 2019 को आयोजित किया गया! राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं कस्तूरबा गांधी 150वीं जन्म शताब्दी वर्ष पर चंपारण के तीन विभूतियों को गांधी पीस फाउंडेशन नेपाल एवं जी -20 देशों के अंतरराष्ट्रीय चयन समिति द्वारा गांधी दर्शन पर्यावरण संरक्षण स्वच्छ भारत मिशन एवं विभिन्न सामाजिक कार्य में उत्कृष्ट कार्यों के लिए डॉक्टरेट की उच्च मानक उपाधि डी .लिट के लिए नामित किया गया है! इन्हें गांधी पीस फाउंडेशन नेपाल एवं जी-20 देशों के शांति दूतों द्वारा मानक उपाधि प्रदान की गई !स्वच्छ भारत मिशन के ब्रांड एंबेसडर सह सचिव सत्याग्रह रिसर्च फाउंडेशन डॉ एजाज अहमद (अधिवक्ता ), बिहार विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के शाहनवाज अली (अधिवक्ता) एवं नीरज गुप्ता ब्रांड एंबेसडर स्वच्छ भारत मिशन को डॉक्टर ऑफ लिटरेचर( D.litt) की मानक उपाधि एवं गांधी ग्लोबल पीस अवॉर्ड से सम्मानित किया गया ! यह सम्मान भारत की सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में आयोजित होने वाले हैं जी-20 देशों के विश्व शांति दूतों के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में दिया गया !यह सम्मान गांधी दर्शन ,इतिहासिक शोध एवं अनुसंधान .पर्यावरण संरक्षण. स्वच्छ भारत मिशन. प्लास्टिक मुक्त भारत अभियान, बाल मजदूरी ,सीमा पार मानव व्यापार ,स्वच्छता सत्याग्रह एवं विभिन्न सामाजिक कुरीतियों से समाज को जागृत करने के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के मूल्य एवं आदर्शों को देश विदेश में फैलाने के लिए इनके 20 वर्षों के सामाजिक कार्यों के अनुभव पर दिया गया है! – इंदौर में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं कस्तूरबा गांधी 150वीं जन्म शताब्दी पर आयोजित होने वाले विश्व शांति दूतों के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन डॉक्टरेट के दीक्षांत समारोह में विदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के चांसलरो. गांधीवादी विचारको. विभिन्न विश्वविद्यालयों के विभाग अध्यक्षों, बुद्धिजीवियों , सामाजिक क्षेत्र के जाने-माने हस्तियों ,विश्व के अनेक गणमान्य अतिथि , भारत सरकार के अनेक प्रतिनिधि एवं सांसदो के समक्ष दिया गया ! इस अवसर पर डॉ एजाज अहमद के नेतृत्व में स्वच्छ भारत मिशन बेतिया पश्चिम चंपारण स्वच्छ सुंदर एवं पर्यावरण संरक्षण देश की नदियों को संरक्षण प्रदान करने पर विस्तृत रूप से गांधी दर्शन एवं स्वच्छता विषय पर विस्तृत चर्चा हुई! श्री एजाज अहमद ने कहा कि यह सम्मान बा बापू एवं बिहार वासियों को समर्पित है!

धर्मनिरपेक्षता पर खतरा पढ़ना शुभ संकेत नहीं

केंद्र सरकार के द्वारा नागरिकता संशोधन का जो विधेयक लेकर आने वाली है, वह हमारे संविधान के समानता के अधिकार का हनन है। यह उस प्रस्ताव का भी अपमान है जिसमें धर्मनिरपेक्ष शब्द को समाहित किया गया है।

यह बात निराधार नहीं कि भारत की धर्मनिरपेक्षता एक मिसाल है तो फिर यहां धार्मिक आधार पर भेदभाव क्यों, निस्संदेह पाकिस्तान ,अफगानिस्तान और बांग्लादेश जैसे देश में धर्म के आधार पर गैर मुस्लिमों को प्रताड़ित किया जाता है लेकिन यह बात भी दावे के साथ कहना मुनासिब नहीं है वहां मुसलमान वर्गों के सभी लोगों को वे सभी रियायत मिल रही होगी जिनके वे हकदार हैं ।अभी नागरिकता संशोधन विधायकों को आधी सफलता भी नहीं मिली है लेकिन देश भर में इसका विरोध किया जा रहा है, इसलिए सरकार इस विधेयक में जरूरी बदलाव करें ताकि किसी भी धर्म पर इसका विपरीत प्रभाव न पड़े और भारत की धर्मनिरपेक्ष छवि पर कोई आंच ना आए किसी धार्मिक आस्था को चोट नहीं पहुंचाई जा सकती है ,इसकी संभावना हमारे संविधान में नहीं है ,फिर भी नागरिकता संशोधन के मामले को लेकर जिस तरह वावेला मचा हुआ है वह भारतीय संस्कृति पर कुठाराघात नजर आ रहा है, इस तरह देखा जाए तो पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश,अन्य देशों में नागरिकता संशोधन विषय पर किसी प्रकार का कोई अंकुश नहीं लग रहा है इसका मुख्य कारण यह है कि जो संशोधित कानून पूर्व से बना हुआ है उसी को उस देश के द्वारा लागू किया जाना ही उस देश की प्रगति पर निर्भर करता है।

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Aditya Prakash Srivastva