बिहार राज्य संपादकीय

विचार :: बाटेंगे प्यार और पोंछेंगे आँसू तो लौटेंगी खुशियां

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विजय कुमार शर्मा, बिहार की कलम से…….

(०४ दिसम्बर)। आमतौर पर जन्मदिन पर लोग मिठाईयां बाँटते हैऔर मित्रों को भोज पर आमंत्रित करते हैं। पर जब अपना कोई पड़ोसी भूखा हो या फिर अपनी गरबी से आहत मदद के लिए कातर दृष्टि से आपको देख रहा हो। तब वह पकवान कैसे अच्छा लगेगा। ऐसा रिवाज बनता जा रहा है कि जन्मदिन के अवसर पर मिठाई पर लगे क्रीम को लोग अपने और दूसरों के मुंह में पोछते हैं। इससे बेहतर होगा कि हम किसी के आंसू को पोछे। उन लोगों को भोजन कराएं ,जो भूख से तड़प रहे हैं या फिर जिन्हें कभी अच्छा भोजन नसीब नहीं हुआ है। वास्तव में यह सर्वोत्तम जन्मदिन का उत्सव होगा। क्योंकि अन्य अवसरों पर हम तो अपने धनाढ्य इष्ट मित्रों को अपना वैभव दिखाने के लिए ऐसा करते हैं। मैंने तो शुरू कर दिया। आज मैंने अपने सुपुत्र आयुष्मान अर्क के जन्मदिवस पर उन बच्चों के बीच क्वेश्चन बैंक उसीके हाथ बटवाया जो अभाव के कारण बोर्ड परीक्षा 2019 के छात्र हैं। परीक्षा की तैयारी हेतु पर कोई गेस या गाईड्स जैसी सहायक पुस्तिका नहीं कर सके थे। दर्जनों छात्रों को बीच क्वेश्चन बैंक बांटते हुए मुझे काफी प्रसन्नता हुई। इसके अतिरिक्त असहायो को कंबल भी कंबल भी सुपुत्र के हाथों से बठवाया तथा दीनबंधुओंं का आशीर्वाद लिया। इसलिए आइए जन्मदिन के बहाने ही सही गरीब ठिठुरते हुए लोगों को अपनी प्यार भरी गर्माहट से मुस्कान दे। उन्हें अपने पुराने गर्म कपड़ों को या फिर नए गर्म कपड़ों को देकर, उनके ठिठुरते होठों को गर्मी दे।

“गाय को भोजन, गरीबों की मदद ऐसा हो हमारा जन्मदिवस”

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Aditya Prakash Srivastva