उत्तर प्रदेश कुशीनगर राज्य

कुशीनगरःःकिसानों ने भुगतान सहित पड़रौना में नई चीनी मिल लगाने की उठाई आवाज

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वरिष्ठ संवाददाता.सुनील कुमार तिवारी

कुशीनगर। कुशीनगर जिले में चीनी मिल की स्थापना के लिये किसानों ने अपनी आवाज बुलंद करना शुरू कर दिया हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा गया हैं जिसमें किसानों का कहा है कि बंद पड़ी पडरौना चीनी मिल पर कई करोड़ों रुपया किसानों की गन्ने का भुगतान पड़ा हुआ है और चीनी मिल जर्जर हो चुकी है। नेता मिल चलाने के आश्वासन पर किसानों को छलने का काम करते आयें हैं जबकि पडरौना में नई चीनी मिल के लिए 300 एकड़ जमीन पर रेशम उत्पादन पडरौना तहसील के अंतर्गत किया है जबकि रेशम का उत्पादन समुचित रुप से नहीं हो पा रहा है।उसससे कोई लाभ नहीं हैं।इसी तरह जिले में गन्ना शोध संस्थान के रूप में पडरौना तहसील के लक्क्षमीपुर में स्थित है जिसका फार्म लगभग 70 एकड़ है। इस जमीन का उपयोग चीनी मिल निर्माण किया जा सकता है क्योंकि एक चीनी मिल लगाने में लगभग 60 एकड़ जमीन की आवश्यकता पड़ती है। गौड़ ने लिखा है कि कुशीनगर जिले में सर्वाधिक क्षेत्र में गन्ना का उत्पादन किया जाता है। किसानों ने यह भी कहा है कि अगर नई चीनी मिल की स्थापना के साथ बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं किया गया तो आंदोलन की डगर पर चलने से परहेज नहीं कर सकेंगे ।जिसकी जिम्मेदारी शासन प्रशासन की होगी।

मालूम हो कि किसानों में चुम्बन पति त्रिपाठी, मनोज मोदनवाल , रजनीकांत, सुरेंद्र सिंह, प्रमोद कुमार ,पप्पू सिंह जनार्दन सिंह, रघुनाथ प्रसाद ,सुरेंद्र तिवारी ,मोनू शुक्ला, पवन कुमार, सहित कई दर्जन किसानों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को स्व हस्ताक्षरित पत्र भेजा है ।जिसमें जिक्र किया हैं कि देवरिया जिले से अलग होने से पहले पडरौना में गन्ना की बुआई सबसे अधिक क्षेत्रफल में होती थी। जिले में नौ चीनी मिलें लगी थी जिसमें सेवरही, कटकुईयां,पडरौना ,रामकोला खेतान, रामकोला त्रिवेणी, लक्षमीगंज, कपतानगंज, खड्डा, छितौनी स्थापित थी। जिसमें कटकुईयां और पडरौना चीनी मिल ब्रिटिश इंडिया कार्पोरेशन की लगी थी जो बंद हो गई। इसी तरह रामकोला खेतान,लक्षीगंज, खड्डा, छितौनी में स्थित चीनी मिलें उत्तर प्रदेश राज्य चीनी निगम की लगी थी। इन सभी बंद चीनी मिलों का गन्ना क्षेत्रफल घटा नहीं बल्कि कुशीनगर के गन्ना किसान अपने गन्ने को पेराई करके गुड़ के रूप में उत्पादन करने लगे। इससे गन्ने किसानों का आर्थिक विकास पूर्व की भांति न हो कर कम होने लगा। और उधर धीरे धीरे सरकारी सभी चीनी मिल फैक्ट्रियां बंद होने लगी जिससेे जिले का गन्ना किसान आर्थिक रूप से कमजोर होने लगे। पत्र में लिखा है कि अपनी भाजपा की सरकार गन्ने किसानों को आर्थिक रूप से मज़बूत देखना चाहती है। इस कार्य के लिए एक और चीनी मिल लगाने के साथ ही पडरौना चीनी मिल पर बकाया पढ़े करोड़ों रुपया का भुगतान किस्तों में मिल की नीलामी कर नहीं किया तो किसान आंदोलन का रास्ता तैयार करने को बाध्य होंगे ।

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Aditya Prakash Srivastva

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