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बेतिया(प.चं.) :: गरिमा सिकारिया पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाने वालों के विरोध में पार्षदों ने खोला मोर्चा

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विजय कुमार शर्मा, कुशीनगर केसरी/केके न्यूज24, बिहार(०४ जनवरी)। गरिमा देवी सिकारिया को नप सभापति के पद से अवैध तरीके से अपदस्थ करने वाले उपसभापति व अन्य के विरोध में समर्थक नगर पार्षदगण ने मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को कार्यकारी सभापति की अध्यक्षता में सम्पन्न बैठक के बाद पूर्व सभापति जनक साह की पत्नी व पार्षद कुमारी शीला, वार्ड 19 की पार्षद जरीना सिद्दीकी, वार्ड 25 के रोहित नाग व वार्ड 06 की पार्षद उर्मिला देवी समेत अन्य अनेक नगर पार्षदों ने मोर्चा खोल दिया है।

उपरोक्त पार्षदगण की ओर से जारी साझा बयान में कार्यकारी सभापति मोहम्मद कयूम अंसारी के नेतृत्व में बने गठजोड़ को अवसरवादी करार दिया है। इनका यह भी आरोप था कि गरिमा देवी सिकारिया के अथक प्रयासों से स्टाम्प ड्यूटी मद में स्वीकृत 14 करोड़ से भी अधिक की सरकारी राशि के बंदरबांट के लिये गरिमा सिकारिया के कार्यकलाप पर भ्रष्टाचार जैसा घिनौना आरोप लगाया जा रहा है। इन नगर पार्षदों का यह भी कहना था कि नगर विकास एवं आवास विभाग द्वारा स्वीकृत डीपीआर के आधार पर की गयी संसाधनों की खरीदारी सरकार के स्तर से बने जेम पोर्टल के माध्यम से की गयी है। जिसके विरुद्ध भुगतान स्वयं विभाग के स्तर से या सीधे विभाग के द्वारा ही किया गया है। जिसके विरुद्ध कोई भी जांच या कार्यवाही नप प्रशासन के अधिकार क्षेत्र से ही बाहर होने के बावजूद इससे सम्बन्धित अनर्गल बयानबाजी मीडिया के माध्यम से की जा रही है। जिसमें बिना सिर पैर वाले तरह-तरह के निराधार आरोप मढ़े जा रहे हैं। ऐसा कर के एक साफ सुथरी छवि की कर्मठ महिला नेत्री की छवि को धूमिल करने का घिनौना और विफल प्रयास किया जा रहा है। ऐसा करके उनकी छवि को खराब करने का प्रयास किया जा रहा है। इन लोगों ने यह भी बताया कि सशक्त स्थायी समिति और नप बोर्ड की स्वीकृति व अनुसंशा के आधार पर की गई विभिन्न संसाधनों की खरीद के विरुद्ध ज्यादातर सामानों का भुगतान पटना से ही विभाग द्वारा किया गया है। जबकि अनेक ख़रीदगी वाले सामानों का भुगतान अभी किया जाना बाकी है। उपरोक्त पार्षदगण ने एक संयुक्त बयान के माध्यम से कार्यपालक पदाधिकारी को स्थिति स्पष्ट करने तथा जिलाधिकारी से भी इसमें हस्तक्षेप करते हुये कार्यपालक पदाधिकारी को निर्देश जारी करने का भी अनुरोध किया है।

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Aditya Prakash Srivastva