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बगहा(प.च.) : मिल प्रबंधक साहब कुंभकरणी नींद से जागिए, जनता को नहीं गन्ना को पेरिए, शुगर मिल्स बेहाल किसान परेसान

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विजय कुमार शर्मा, बगहा(प.च.) बिहार(०३ फरवरी)। मिल प्रबंधक एमडी साहब आपको पता ही होगा कि पूंजीपति कभी घाटे के व्यवसाय नहीं करते। एक चीनी उद्योग मे तो खुज्जे(छिलके) तक बेचकर मालिक लाभ कमा लेता है। चीनी तो दूर की बात है। एक चीनी उद्योग के पास तैयार मटेरियल में बहुत सी चीजें आती हैं ।खासकर मट, छोआ, चीनी आदि। इसे बेचकर किसानों को ससमय उनके पैसे का भुगतान किया जा सकता है । आपको सदैव याद रखना चाहिए कि गरीबों को सताने वाले का कभी व किसी प्रकार से भला नही होता है। जिस प्रकार भट्टा (उद्योग ईट) उद्योग वाले मिट्टी को बेचकर ज्यादा दिनों तक फलते फूलते नहीं, मिटटी में मिल जाते हैं। उनका रोजगार बरसाती नदी की तरह बढ़ता है। चंद दिनों के बाद समाप्त हो जाता है ।ठीक उसी प्रकार गरीब किसानों को शोषित करने वाला पूंजीपति भले ही अहंकार रूपी आसमान में हिलोरे लेता हो। पर जब गरीबों की आह लगती है। तब बादलों की भांति हवा के झोंके के साथ तितर-बितर हो जाते हैं। इसीलिए रहीम कवि ने कहा है कि निर्धन को न सताइए जाकी मोटी हाय मुई चाम की भूख से सार भस्म हो जाए। आप जिन चंद लालची, लोभी लोगों के बहकावे में आकर यहां के गरीब किसान मजदूर जिन्होंने अपनी बेटी की शादी आपके समय से मिल चलाने के कारण ,इस आस में तय कर दिया कि आप समय से भुगतान करेंगे तथा वे अपनी बेटी की शादी सुंदर ढंग से कर पाएंगे ।पर उनकी अपेक्षाओं के विपरित जिस तरह से आप की तुगलकी फरमान ने चंद लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए कैलेंडर सिस्टम के माध्यम से पूर्जी निकालने या सरकार के बहाने गन्ना किसानों का भुगतान नहीं कर रहे हैं । इससे यह सिद्ध होता है कि आप गन्ना नहीं बल्कि बगहा की जनता की पेराई कर रहे हैं क्योंकि आपको पता है कि आप की कारगुजारी के कारण चंद दलाल उत्तर प्रदेश से सस्ते दर पर गन्ना खरीद रहे हैं और यहां ऊंची मुनाफे पर गन्ना फैक्टरी में गिराकर आपके कृपा से मालामाल हो रहे हैं। यह आपके लिए उचित नहीं है । आप जनता की शक्ति को पहचानिए । रामधारी सिंह दिनकर की “जनतंत्र का जन्म” शीर्षक कविता की उन पक्तियों को याद कीजिए जिन्होंने जिसमें उन्होंने आप जैसे तुगलकी फरमान जारी करने वाले या फिर राजनैतिक लाभ उठाने के लिए भोलीभाली जनता को उल्लू बनाने वालों के लिए लिखा है ” हुँकारो से महलों की नींव उखड़ जाती, सांसों के बल से ताज हवा में उड़ता है, जनता की रोके राह, समय में ताव कहाँ ? वह जिधर चाहती, काल उधर ही मुडता है ।अतः आपसे विनम्र प्रार्थना है कि गरीब किसानों के गन्ने का बकाया भुगतान शीघ्रातिशीघ्र करें। जनता का आशीर्वाद मिलेगा। किसी की दुआ लगे या ना लगे ब- दुआएं जरूर लग जाती है । जनता को आप से काफी अपेक्षाएं हैं। आप उनकी बद्दुआओं से बचने का प्रयास करें । मैं तो यही कहूंगा जनता को छोड़िए जनाब गन्ने को पेरिए , पैसे का भुगतान करके किसानों के जीवन में मिश्री घोलिए। जनता को नेतागिरी करने से आप बचा सकते हैं क्योंकि जब जनता नेतागिरी करेगी तो खेती कौन करेगा ?

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Aditya Prakash Srivastva