पश्चिमी चम्पारण बगहा बिहार राज्य

बगहा(प.च.) : बड़े शहरो से हतास व निराश लौटी ब्रेन ट्यूमर केंसर से जिन्दगी से जंग लड़कर हारी महिला को होमियो चिकित्सा प्रणाली ने दिया नया जीवन दान

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विजय कुमार शर्मा प.च. बिहार(१३ फरवरी)। कहा जाता है की लहरों से डरकर नौका पार नही होती कोशिश करने वाले कि कभी हार नही होती वही बात आज बगहा के बन बिकाश भारती होमियो सेवा अस्पताल में देखने को मिला कि एक गरीब परिवार से विलोम करने वाली महिला प्रखण्ड बगहा एक के चिउटाहा निवासी एहसान अली की लगभग 50 वर्षिय पत्नी मुन्नी खातून ने अचानक अचेत होकर गिर हाथ पैर छटपटाना बेचैनी होने लगा और महिला कोमे में चली गई जिसे तुरंत इलाज हेतु हरनाटाड परिजन लेकर गए जहाँ पर डॉक्टर ने देखते ही पीड़ित महिला को रेफर कर दिया जिसे आनन फानन में उसे उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में मेडिकल कॉलेज में भर्ती किया गया जहाँ डॉक्टर ने सिटी एस्केन कराकर इलाज तीन दिन तक इलाज करना सुरु किया सुधार नही होने पर उसे फिर लखनऊ के पीजीआई में रेफर किया गया फिर परिजनों द्वारा ले जय गया वहाँ डॉक्टर ने जाँचो प्रान्त बताया कि इस ब्रेन ट्यूमर केंसर को ऑपरेशन करना पड़ेगा जिसमे लगभग चार लाख रुपये लग सकता है फिर भी परिजन ने अपना हौसला नही हारा और डॉक्टर को पैसा देने की बात कहते हुए पूछा कि क्या पूरी तरह से दुरुस्त रह बीमारी से निजात पा सकती है वहा डॉक्टर ने बताया कि ज्यादा से ज्यादा वह तीन महीने के मेहमान रह सकती है जिससे परिजन ने हतास व निराश होकर कोमा में रही महिला को वापस घर लेकर लौट आए बड़े बड़े शहरो में इलाज नही होने के वजह से परिजन करे तो क्या करे अचानक उनके मन मे अपना ही छोटा सहर चम्पारण की धरती पर स्थापित बन बिकाश भारती होमियो सेवा केंसर संस्थान होस्पिल का ख्याल जगा और परिजन इलाज हेतु डॉक्टर पदमभानु सिंह से मुलाकात की जहाँ डॉक्टर सिंह ने परिजन को होमियो पैथ के इलाज करने का सलाह देकर अपने हॉस्पिटल में एडमिट कर दिया और इलाज सुरु किया लगभग दस दिन इलाज करने के क्रम में महिला कोमे से धिरे धीरे बाहर आना सुरु कर दी जो आज पूरी अच्छी तरह से स्वस्थ है। खाना पीना चलना काम करना बात चीत करना हर तरह से स्वस्थ है वहीं बगहा के बन बिकाश भारती होमियो सेवा संस्थान केंसर हॉस्पिटल के डॉक्टर पदमभानु सिंह ने बताया की यह महिला मेरे हॉस्पिटल में कोमे में आई थी जो एक ही जगह पेसाब पैखाना के द्वारा पाइप लगाकर आई थी। जिसको होमोपैथी पर भरोसा देकर इलाज करना सुरु कर दिए और आज वह पूरी तरह से कैंसर से निजात लगभग दो से तीन साल में निजात मिल गए है वही डॉक्टर सिंह ने बताया कि एलोपैथी में ज्यादा पैसो के इलाज के वजह से होमीओपेथी पर भी बिस्वास कर बड़ी से बड़ी बीमारियों से निजात पाया जा सकता है।

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Aditya Prakash Srivastva