उत्तर प्रदेश कुशीनगर राज्य

कुशीनगर :: विभाग के मिलीभगत से जिले के विद्यालयोंं में छात्रों के साथ होता है भयंकर धोखाधड़ी

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मनोज पांडेय/आदित्य प्रकाश श्रीवास्तव कुशीनगर केसरी/kknews24 कुशीनगर(०६ जून)। जनपद के विद्यालयों में बोर्ड के समय बोर्ड फीस के नाम पर छात्रों से तय शुल्क से लगभग ₹200 से लेकर ₹300 रुपये तक की ज्यादा वसूली की जाती है। शिक्षा विभाग के आला अफसर की मिलीभगत से यह वसूली किए जाने का मामला प्रकाश में आया है। जबकि इस अवैध गोरखधंधे को लगाम लगाने के लिए विभाग के आला अफसर को पत्र भी लिखा गया है लेकिन आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुई। जिससे इन विद्यालयों के दबंगई का परचम फैलता जा रहा है।

गौरतलब है कि जनपद के विभिन्न  ब्लॉकों में  चल रहे वित्त पोषित विद्यालयों  में  प्रधानाचार्य व शिक्षकों की मनमानी चरम पर है। इसी कड़ी में विशुनपुरा ब्लाक के मंसाछापर के नेहरू इंटर कॉलेज के प्रबंधक लल्लन दुबे के आदेश से शिक्षक मदन मोहन, अमित मिश्रा चपरासी द्वारा कक्षा 10 के छात्रों से अतिरिक्त शुल्क लिया जाता है। जिसमें 10 के सैकड़ों छात्रोंं से ₹745 रुप की वसूली की गई। जबकि बोर्ड के अनुसार ओरिजनल फीस कक्षा 10 की ₹598 रुपये है लेकिन उसके बदले ₹745 रुपया लिया गया। जबकि शासनादेश 15 जनवरी 2010 में इसकी कोई जिक्र नहीं है। इस बात की जानकारी मिलने पर भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष निशान्त शुक्ला ने अपने शिकायती पत्र द्वारा जिला विद्यालय निरीक्षक को दिनांक 23 अप्रैल 2019 को दिया। जिला विद्यालय निरीक्षक कुशीनगर के आदेश पर प्रधानाचार्य ने अपनी आख्या अप्रैल 2019 मेेंं ही प्रस्तुत कर दिया, परंतु जिला विद्यालय निरीक्षक उदय प्रकाश मिश्रा द्वारा दोषियों को बचाने का कार्य किया जा रहा है। शिकायतकर्ता निशांत शुक्ला ने अवगत कराया कि जिले के 55 सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों में से 50 के करीब विद्यालयों में पढ़ने वाले गरीब तथा मेधावी छात्रों का सरकारी नियमों के विपरीत उत्पीड़न किया जाता है। यदि इसे तत्काल सुधार नहीं किया जाता है तो संगठन व जिले के तमाम विद्यालयों के गेट पर जमीनी संघर्ष किया जाएगा। जिसके जिम्मेदार विद्यालय के प्रधानाचार्य स्वयं होंगे एवं प्रबंधक भी होंगे। जबकि गांधी किसान इंटर कॉलेज खड्डा के प्रबंध संचालक स्वयं उदय प्रकाश मिश्रा ही हैं जहां बच्चों से सालाना शासनादेश के विपरीत ₹500 रुपए प्रतिवर्ष ज्यादा लिया जाता है। सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत राष्ट्रीय इंटरमीडिएट कालेज भुजौली बुजुर्ग में भी है जिसके प्रबंध संचालक स्वयं जिले के लेखाधिकारी हैं। ऐसे ही दसों विद्यालय में जब जनपदीय अधिकारियों की देखरेख में इस प्रकार की व्यवस्था फल फूल रही है तो प्राइवेट मैनेजमेंट के यहां की स्थिति का आकलन किया जा सकता है। इस संदर्भ में संयुक्त शिक्षा निदेशक श्री योगेंद्र प्रताप सिंह की उदासीनता भी बनी रहती है। अगर ऐसे ही शिक्षा विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी छात्रों को लूटते रहे तो छात्रों का भविष्य कहां जाएगा।

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Aditya Prakash Srivastva