उत्तर प्रदेश कुशीनगर राज्य

कुुशीनगर :: अवैध ढंग से संचालित किए जा रहे अनाथ आश्रम पर प्रशासन ने किया कार्यवाही, रह रहे बच्चों को किया रेस्क्यू, चिकित्सकीय परीक्षण के बाद सीडब्ल्यूसी को सौंपे जाएंगे बच्चे

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::– फर्जी तरीके से चल रहे परसौनी अनाथालय पर हुई बड़ी कार्यवाही ::– वसुमता सरीन के कब्जे से 25 बच्चों को प्रशासन से सकुशल रेस्क्यू कराया ::– रेस्क्यू में कुछ महिला कांस्टेबलों को भी आयी हैं चोटें : सूत्र ::– बच्चों को मेडिकल परीक्षण के लिए भेजा गया। ::– रेस्क्यू कराते समय अनाथ आश्रम की संचालिका और उसके परिवारीजनों ने काटा था बवाल, अनाथ आश्रम की संचालिका सहित अन्य कई को पुलिस ने हिरासत में लिया ::– समाचार पत्रों ने प्रमुखता से उठाया था परसौनी अनाथालय में चल रहे खेल का मामला ::– कुशीनगर जिले के पडरौना नगर से सटे परसौनी कला में चल रहा था अवैध अनाथ आश्रम, जहां बच्चों का धर्मांतरण कराती थी संचालिका वसुमता शिरीन। ::– डीएम सहित संभ्रांंत लोग इस अवैध अनाथालय पर अपनेेेे जन्मदिन सहित विशेष दिवस को बड़े ही गर्व सेेे जाकर मनाते थे और आज हुई कार्यवाही। ::– या और आज परिणाम भी सामने आया। बताते चलें कि आज तक जितने भी बच्चे इस बसुमता सरिन केेे अनाथालय में  बच्चे कहां से आए और वह बच्चे कहां और किस हाल में हैं, उनकी भी जांंच होनी चाहिए।

आदित्य प्रकाश श्रीवास्तव, कुशीनगर केसरी/kknews24 पडरौना, कुशीनगर(२१ जुलाई)। पडरौना नगर से कुछ ही दूर पर स्थित परसौनी कला में अवैध रूप से संचालित हो रहे अनाथालय पर प्रशासन ने बड़ी कार्यवाही की है। बिते दिनों अनाथालय के जांच के दौरान उत्तर प्रदेश बाल संरक्षण आयोग की सदस्या डॉक्टर शुचिता चतुर्वेदी ने अवैध रूप से संचालित हो रहे हैं अनाथालय का औचक निरीक्षण किया और डॉक्टर चतुर्वेदी ने अपने पत्र मे अनाथालय को किशोर न्याय बालकों की देखरेख एवं संरक्षण अधिनियम 2015 एवं आदर्श अधिनियम 2016 का खुला उल्लंघन बताया था। जिसके अंतर्गत इस प्रकार संचालित होने वाले संस्थाओं का उक्त अधिनियम के अंतर्गत रजिस्ट्रेशन होना अनिवार्य है तथा सभी प्रकार के मानकों पर खरा उतरना भी जरूरी है।

उसी उसी कड़ी में जिलाधिकारी ने बाल संरक्षण आयोग की सदस्या केे पत्र के आलोक में गठित टीम से जांच कराकर अवैध रूप से चल रहे अनाथालय में आज 21 जुलाई को रेस्क्यू करा कर बच्चों को स्वास्थ्य परीक्षण हेतु भेज सीडब्ल्यूसी को सौपने की कार्यवाही चल रही है और दोषियों को गिरफ्तार कर अगली कार्यवाही में प्रशासन जुटी हुई है।

गौरतलब है कि पिछले 15 जुलाई को उत्तर प्रदेश बाल संरक्षण आयोग की सदस्य डॉ शुचिता चतुर्वेदी ने अवैध रूप से संचालित इस अनाथालय का औचक निरीक्षण किया था। निरीक्षण में डॉक्टर चतुर्वेदी के द्वारा अनाथालय को अवैध एवं मानक के विपरीत पाया गया।जिसको लेकर उन्होंने जिलाधिकारी कुशीनगर एस राज लिंगम एवं प्रमुख सचिव उत्तर प्रदेश शासन को पत्र लिखा था। डॉक्टर चतुर्वेदी ने जिलाधिकारी के सामने यह प्रश्न खड़ा किया था की पिछले सन 2000 से लेकर अब तक मानक के विपरीत चल रहे इस अनाथालय पर कोई कार्यवाही क्यों नहीं हुई ? ना ही इसकी जांच हुई। डॉक्टर चतुर्वेदी ने अपने पत्र मे अनाथालय को किशोर न्याय बालकों की देखरेख एवं संरक्षण अधिनियम 2015 एवं आदर्श अधिनियम 2016 का खुला उल्लंघन बताया था। जिसके अंतर्गत इस प्रकार संचालित होने वाले संस्थाओं का उक्त अधिनियम के अंतर्गत रजिस्ट्रेशन होना अनिवार्य है तथा सभी प्रकार के मानकों पर खरा उतरना भी जरूरी है। विभिन्न आयु वर्ग के बच्चों एवं बच्चियों को रखने के लिए अलग-अलग मानक बनाए गए हैं जो उक्त अनाथालय पर बिल्कुल नहीं दिखा। सभी आयु वर्ग के बच्चे एक ही साथ रह रहे थे एवं इसके साथ ही साथ सभी बच्चों के नाम एक धर्म विशेष के आधार पर रखकर उनके नाम साथ बसुमता जोड़ कर रखा गया था जो कि संचालिका का उपनाम था, जो कानून का उल्लंघन है।

इन सभी को संज्ञान में लेते हुए जिलाधिकारी के द्वारा उप जिलाधिकारी पडरौना कोमल यादव को उक्त प्रकरण में जांच कर अपनी रिपोर्ट देने के लिए कहा गया था।बुधवार २१ जुलाई दोपहर को उप जिलाधिकारी पडरौना कोमल यादव, क्षेत्राधिकारी सदर संदीप कुमार वर्मा, इंस्पेक्टर कोतवाली अनुज कुमार सिंह, थानाध्यक्ष महिला थाना तिलोत्तमा त्रिपाठी सहित महिलाओं एवं पुरुष सुरक्षाकर्मियों के साथ उक्त अनाथालय पहुंचे तथा वहां से रह रहे बच्चों को रेस्क्यू करने का प्रयास कर रहे थे। इसी बीच उक्त अवैध अनाथालय की संचालिका सरीन वसुमता उसके पुत्र दान, जयंत और रूबेन के द्वारा प्रशासनिक कार्यों में बाधा उत्पन्न की गई, साथ ही साथ भावनात्मक रूप से बच्चों को भड़का कर उपस्थित सुरक्षा कर्मियों एवं अधिकारियों के साथ धक्का-मुक्की भी की गई। अंततः उप जिलाधिकारी एवं सीओ सदर के नेतृत्व में बच्चों को रेस्क्यू कर संयुक्त जिला चिकित्सालय जिला मुख्यालय रविंद्र नगर लाया गया तथा उनका चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया। इस अवसर पर सीडब्ल्यूसी की दीपाली सिन्हा भी उपस्थित रही। सूत्रों की माने तो सीडब्ल्यूसी के द्वारा विभिन्न आयु वर्ग के बच्चों के हिसाब से उन्हें मानक के अनुसार संचालित हो रहे अनाथालय में शिफ्ट कराया जाएगा और अनाथालय की संचालिका सरीन बसुमता उनके बेटों ,बहू भारती एवं कुछ अन्य पर भी कानूनी कार्यवाही की जा सकती है। उक्त संदर्भ में अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है लेकिन इस प्रकार की बड़ी कार्रवाई की है तो इस प्रकार का अनुमान लगाया जा रहा है कि निश्चित रूप से उप जिला अधिकारी के द्वारा की गई जांच में बड़ी गड़बड़ी मिली होगी, जिसको लेकर कार्यवाही होनी तय है। डीएम सहित संभ्रांंत लोग इस अवैध अनाथालय पर अपनेेेे जन्मदिन सहित विशेष दिवस को बड़े ही गर्व सेेे जाकर मनाते थे और आज हुई कार्यवाही सेे साफ जाहिर हो गया कि कभी किसी ने इसके तह तक जाने का प्रयास नहीं किया नहीं तो यह खुलासा बहुत पहले हो चुका होता। यह तो शुक्र है बाल संरक्षण आयोग के सदस्या डॉक्टर शुचिता चतुर्वेदी का जिन्होंने संज्ञान में लेकर मामले केेेेेे तह तक जाने का प्रयास किया और आज परिणाम भी सामने आया। बताते चलें कि आज तक जितने भी बच्चे इस बसुमता सरिन केेे अनाथालय में  बच्चे कहां से आए और वह बच्चे कहां और किस हाल में हैं, उनकी भी जांंच होनी चाहिए।

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Aditya Prakash Srivastva