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बगहा(प.चं.) :: भारी मात्रा में पुलिस जिला बगहा के नदी थाना पुलिस ने पकड़ी विदेशी शराब

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विजय कुमार शर्मा, कुशीनगर केसरी/kknews24, बिहार(१० सितंबर)। बिहार में जैसे-जैसे पंचायत चुनाव नजदीक आ रहा है वैसे-वैसे शराब की तस्करी तेजी से बढ़ने लगी है। इसी क्रम में शुक्रवार को भी भारी मात्रा में बगहा पुलिस ने शराब जब्त किया। थाना ने सुबह जांच के क्रम में 3 हज़ार 52 लीटर शराब जब्त किया। विदेशी शराब को एक डीसीएम ट्रांसपोर्ट से उत्तर प्रदेश के लखनऊ से लाया जा रहा था जिसे बेतिया ले जाना था। ऐसे में नदी थाना पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि गौतम बुद्ध सेतु पुल से होकर शराब की बड़ी खेप बेतिया में सप्लाई करने की तैयारी में थी। जिसे पुलिस ने जब्त कर लिया। डीसीएम ट्रांसपोर्ट के अंदर 650 कार्टून शराब था। जहां शराब की अनुमानित कीमत लगभग 48 लाख है। शराब को डीसीएम ट्रक के अंदर रख ऊपर से अंडा का कैरेट रखा गया था। ताकि किसी को शराब की भनक न लगे। गिरफ्तार ड्राइवर से पुलिस पूछताछ कर रही है। इनसे शराब के धंधे से जुड़े कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली है। बिहार में होने वाले पंचायत चुनाव को लेकर शराब के तस्कर सक्रिय हैं।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मतदाताओं को अपने पक्ष में लुभाने के लिए पंचायत के उम्मीदवारों के बुकिंग पर शराब की खेप लेकर आ रहे थे। हालांकि पुलिस भी शराब तस्करों पर पैनी नजर रख रही है। लगातार दूसरे दिन गौतम बुद्ध सेतु के एप्रोच पथ पर शराब से भरी गाड़ी को जब्त किया गया। इंस्पेक्टर ने आशंका जताया कि मतदाताओं को रिझाने के लिए प्रत्याशी शराब का उपयोग कर सकते हैं । जिसे लेकर लगातार शराब की तस्करी का प्रयास किया जा रहा है लेकिन तस्कर अपने मंसूबे में कामयाब नहीं होंगे। चुनाव में मतदाताओं को लुभाने और मतदान को प्रभावित करने के लिए शराब के इस्तेमाल को रोकना चुनाव आयोग के लिए यह एक बड़ी चुनौती होगी। पिछले कुछ दिनों से यूपी बिहार बॉर्डर पर तस्करों से शराब की लगातार बरामदगी और इसकी तस्करी में शामिल लोगों की गिरफ्तारी से यह साफ है कि चुनाव आयोग के लिए इस पर नियंत्रण पाना आसान नहीं होगा। अंतर्राज्यीय सीमा से सटे बॉर्डर के इलाकों में शराबखोरी पर रोक लगाना उत्पाद विभाग एवं स्थानीय पुलिस के लिए भी चुनौती बनती जा रही है। कार्रवाई एवं सख्ती बरते जाने के बाद भी शराब तस्करी एवं शराब पीने के मामले सामने आ रहे हैं। विभाग द्वारा गिरफ्तारी एवं बरामदगी के आंकड़ों पर उपलब्धि का मूल्यांकन किया जाता है। लेकिन, तमाम कोशिशों के बाद भी शराब की खेप पड़ोसी राज्यों से पहुंच रही है।

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Aditya Prakash Srivastva

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