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मिर्जापुर :: पूर्वांचल के सबसे कठिन व महत्वपूर्ण ब्रत…सन्तान की लंबी उम्र और निसंतान को वरदान के रूप में पुत्र व पुत्री प्राप्ति का है जिउतिया व्रत

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अन्नपूर्णा श्रीवास्तव, कुशीनगर केसरी/kknews24, मिर्जापुर(२९ सितंबर)। हिंदू धर्म में जितिया व्रत का बहुत अधिक महत्व होता है। इस व्रत में महिलाएं संतान की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं। इस व्रत को जिउतिया, जितिया, जीवित्पुत्रिका, जीमूतवाहन व्रत नाम से भी जाना जाता है और यह व्रत तीन दिन तक चलता है। हर साल आश्विन मास के कृष्ण पक्ष से इस व्रत की शुरुआत हो जाती है और व्रत का समापन आश्निन मास के कृष्ण पक्ष की नवमी पर होता है।

बता दें कि जीवित्पुत्रिका व्रत संतान प्राप्ति और उसकी लंबी आयु की कामना के साथ किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को करने से संतान के सभी कष्ट दूर होते हैं। सितंबर के आखिरी माह में महिलाओं द्वारा निर्जला व्रत रखा जाता है और 24 घण्टे बाद व्रत का पारण किया जाता है। जिउतिया व्रत पूजा विधि…… सुबह जल्दी उठकर स्नान किया जाता है। स्नान आदि करने के बाद सूर्य नारायण की प्रतिमा को स्नान कराया जाता है। धूप, दीप आदि से आरती और इसके बाद भोग लगाया जाता। मिट्टी और गाय के गोबर से चील व सियारिन की मूर्ति बनाकर। कुशा से बनी जीमूतवाहन की प्रतिमा को धूप-दीप, चावल, पुष्प आदि अर्पित किया जाता है। विधि- विधान से पूजा किया जाता है महिलाएँ जिउतिया व्रत की कथा सुनाती हैं जो अवश्य सुनना चाहिए। व्रत पारण के बाद दान पुण्य जरूर करना चाहिए जितनी श्रद्धा समर्थ हो ।

अन्नपूर्णा श्रीवास्तव

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Aditya Prakash Srivastva