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बाल्मीकिनगर(प.चं.) :: बाल्मीकि टाइगर रिजर्व से भटक जानवर रिहायशी इलाकों में मचा रहे हैं आतंक

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विजय कुमार शर्मा, कुशीनगर केसरी/kknews24, बिहार(०२ अक्टूबर)। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से भटक आए दिन जानवरो का सिलसिला अब रिहाइशी इलाकों में जाकर मचा रहे है आतंक इसी दौरान शनिवार की तड़के सुबह में बाल्मीकि टाइगर रिजर्व के जंगल गोबर्द्धना वन सीमा में भालू ने रिहायशी इलाकों में पहुच तांडव मचाना शुरू कर दिया जो एक युवक पर हमला बोल जख्मी कर घायल कर दिया वही युवक की पहचान रामनगर प्रखण्ड परसौनी गांव निवासी 32 वर्षीय लालबाबू महतो के रूप में की गई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार युवक घास काटने के लिए बरवा बैरिया सरेह में गया था। जहा भालू ने युवक को देख हमला करते हुए युवक का बायां हाथ पूरी तरह से काट लिया है। इस दौरान छाती और पीठ पर भी गंभीर रूप से चोट आई है। जब भालू ने युवक पर हमला किया तो इस दौरान चीखने व चिल्लाने की आवाज सुन गांव के कुछ लोग घटना स्थल पर पंहुच गए, जिसके कारण उसकी जान बच गई। जिन्हें घायल अवस्था मे लोगो ने आननफानन में उसके परिवार के सदस्य के साथ गंभीर हालत में रामनगर पीएचसी ले गए । जहां उसे डॉक्टरों ने प्रथमोउपचार कर बेहतर इलाज के लिए बेतिया एमजेके अस्पताल रेफर कर दिया गया मामले की जानकारी देते हुए इलाज कर रहे डॉक्टर ने बताया कि भालू ने युवक के ऊपर हमला कर हाथ तोड़ दिया है। हाथ के हड्डी को भी भालू ने नुकसान पहुंचाया है। इसी तरह बीते 25 जुलाई को भी भालू ने एक युवक पर हमला कर घायल कर दिया था विगत 25 जुलाई को भालू के हमले में रामनगर के परसा गांव का दुखानाथ गंभीर रूप से घायल हो गया था। भालू के हमले से उसके सिर, छाती और पीठ गंभीर रूप से जख्मी हो गया था। भालू ने युवक के सिर पर हमला किया है, इसके बाद गंभीर स्थिति में बेतिया इलाज कराया गया। महीनों इलाज कराने के बाद युवक ठीक हो सका। लगातार रिहाइशी इलाकों में जंगली जानवर घुस जा रहे है, जिससे जान-माल को क्षति हो रही है। तीन माह पहले बाघ के हमले में एक युवक की जान चली गई थी। जिसके बाद लोगों में दहशत का माहौल बन गया था ।बरसात आने पर जंगली जानवरों का खतरा बरसात शुरू होने के साथ ही गंडक नदी का जलस्तर बढ़ता है, जिससे जंगल में पानी भर जाता है। इसके बाद जंगली जानवर जंगल से निकलकर रिहायशी इलाके में शरण लेने के लिए ऊंची जगहों की तलाश में निकलते हैं। इसलिए जंगल से सटे रिहायशी इलाकों में जानवरों के हमले का खतरा बढ़ जाता है। जिसके भय से रिहायशी इलाकों के लोग रतजगा भी करने में लगे हैं।

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Aditya Prakash Srivastva