पश्चिमी चम्पारण बगहा बिहार राज्य

बगहा(प.चं.) :: पति व सास ने नवजात बच्ची को अपनाने से किया इनकार

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विजय कुमार शर्मा, कुशीनगर केसरी/kknews24, बिहार(१३ अक्टूबर)। बगहा अनुमंडलीय अस्पताल में बेटी के जन्म पर एक अजीबोगरीब मामला प्रकाश में आया है। बताते चले की जब बेटी के जन्म लेने पर पिता ने नवजात शिशु को अपनाने से इंकार कर दिया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार परिजनों ने बताया कि बेटे के इंतजार में बार बार बेटी पैदा होना हमारे दुर्भाग्य की बात है मामला का उजागर तब हुवा जब चौथी बार बेटी ने ही जन्म लिया तो बहु के सास और पति ने बेटी को अपनाने से इंकार करते हुए घर ले जाने से अपना पड़ड़ा झाड़ते हुए इंकार कर फरार हो गया। वहीं पीड़िता मंगलवार की शाम से आंख पर आंख धरे अस्पताल में पति का इन्तेजार कर रही थी । मामला बगहा नगर परिषद के शास्त्रीनगर मुहल्ले की है जिसकी पहचान पोखरा टोला वार्ड 18 के प्रदीप सहनी की पत्नी रीता देवी बताई गई है जिन्होंने अनुमंडलीय अस्पताल बगहा में एक नवजात बच्ची को जन्म दिया। जिसे देखते ही परिजनों ने सिर्फ इसलिए हंगामा खड़ा करते हुए इंकार कर दिया क्योंकि यह उनकी चौथी बेटी हुई थी। जिसे देख नवजात बच्ची के पिता और दादी ने बच्ची को घर ले जाने से इंकार कर दिया। लिहाजा मंगलवार की संध्या से ही प्रसूता महिला अस्पताल में पड़ी अपने पति का राह देख रही थी। उसका कहना था कि बच्ची का लालन पालन के लिए मजदूर कर भरण पोषण कर लेगी बावजूद परिजन ले जाने से मना कर रहे थे । वही साथ आई अस्पताल में पीड़िता के साथ आशा का कहना है कि जब उसने नवजात बच्ची के जन्म की सूचना उसके पिता को दी गई तो वह गांव के ही पोखरा में जाकर कुद के आत्महत्या करने के कोशिश की और बार बार यह धमकी दे रहा था कि यदि नवजात बच्ची घर आ गई तो वह जान से मार देगा। इस मामले को लेकर अस्पताल में पीड़िता के सास को स्थानीय लोग समेत स्वास्थ्यकर्मियों ने भी लाख समझाने की प्रयास किये लेकिन वह नवजात और उसके मां को घर ले जाने को तैयार नही हुई। नतीजतन यह मामला तूल पकड़ते हुए अस्पताल समेत आसपास में इस घटना की चर्चा जंगल मे आग की तरह फैल गई है। मामले की जानकारी देते हुए अस्पताल उपाधीक्षक डॉक्टर राजेश सिंह ने बताया कि महिला ने मंगलवार की संध्या में एक पुत्री को जन्म दिया है। जिसकी भनक लगते ही उसके परिजन उसपर भड़के हुए दुखी हैं और बच्ची को आपने के साथ ही उसे घर ले जाने से इंकार कर रहे थे। हालांकि लोगों द्वारा अपनी फजीहत होते देख और लोगों के तरह तरह की बात सुन पीड़िता की सास उसे अपने घर ले गई। कहने में कोई अतिशयोक्ति नहीं की बेटियों को भले ही लोग लक्ष्मी का दर्जा देते है लेकिन आज भी बेटों की चाह में इतनी प्रबल है कि लोग इस तरह के कुकृत्य से भी नहीं डरते हैं। जो आज एक तरफ पूरा भारत नारी स्वरूप जिस आदिशक्ति के पूजा उपासना में लीन है। और आज उपासना के तहत लोग कन्या को भोजन करा व्रत का समापन कर रहे हैं। ठीक इसी दिन इस बेटी का अपमान एक पिता व परिजन के द्वारा होते देख पूरा समाज हतप्रभ है तो वहीं सरकार के इस बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ अभियान पर भी करारा प्रहार होता नजर आ रहा है।

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Aditya Prakash Srivastva

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