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सीतापुर :: कथा से गदगद हुए लहरपुर वासी

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डेस्क, कुशीनगर केसरी/kknews24, लहरपुर, सीतापुर(२७ नवंबर)। कथावाचक श्री प्रेम भूषण महाराज ने रघुवंश का वर्णन करते हुए कहा की मांधाता अंशुमान दिलीप अज रघु दशरथ आदि महा प्रतापी राजा रघुवंश में पैदा हुए धर्म आचरण पर रहे और जनता की सेवा की सभी धर्मशील रहे।
संत श्री ने कहा साधन संपन्नता के साथ भजन कीर्तन भी आवश्यक है आदमी का नाम रह जाता है उन्होंने भजन के राम कथा प्रारंभ की
नाम रह जाएगा आदमी का क्या भरोसा है इस जिंदगी का हम रहे ना मोहब्बत रहेगी दास्ता अपनी दुनिया कहेगी उन्होंने आगे कहा परशुराम जी ने पहले ही बता दिया था सीता देवी दिव्यरूपा है उनका विवाह भी दिव्य रूप से होगा जो धनुष की प्रत्यंचा चढ़ा देगा वही सीता का पति होगा धनुष भंग के बाद परशुराम जी तपस्या करने महेंद्र पर्वत पर चले गए अयोध्या पहुंचे मिथिलापुरी के दूतों ने पत्रिका दी कि आप बारात लेकर मिथिलापुरी पधारें दशरथ जी प्रेम में डूब गए ओला के शरीर है छाती भर आई है। जब राजा न्योछावर देने लगे तो दूत बोले हम बिटिया के यहां का जल नहीं लेते फिर कोई उपहार कैसे ले सकते हैं कथावाचक जी ने कहा जिस तरह नदियां समुद्र में विलीन हो जाती हैं उसी तरह धर्मशील व्यक्ति के पास धन वैभव अपने आप आ जाता है बरात तैयार हुई तो सारे सगुन होने लगे उन्होंने कहा भारत वेदों का संत मुनियों का देश है जितने भी भगत तीर्थ यात्रा जाते हैं एक रिसर्च के हिसाब से भारत सरकार की कुल आमदनी का 60% धार्मिक क्षेत्र से आयकर आता है इधर जनक ने अपने पड़ोसी राजाओं को बोल दिया की नदियों पर पुल बनाया जाए जिससे बारात आसानी से उतर सके रहने खाने पीने की सुंदर व्यवस्था की गई भगवान राम को देखकर पूरी बरात खुशी से भर उठी पुत्रों के साथ राजा दशरथ को देखकर नगर की नर नारियां सभी प्रसन्न हो गई तभी मंत्रियों ने सलाह दी हे जनक जी चार भाई हैं भाइयों को मिलाकर आपके चार पुत्रियां हैं सीता उर्मिला मांडवी और श्रुति कीर्ति इसलिए इन सभी का विवाह दशरथ पुत्रों के साथ कर दिया जाए जनक जी प्रसन्नता के साथ राजी हो गए। राम कथा बहुत पवित्र और सद्गति देने वाली है इसलिए सभी लोग राम कथा का श्रवण करें चिंतन करें और मनन करें।

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Aditya Prakash Srivastva